Navratri Day 1: The Divine Significance of Maa Shailputri and Her Blessings

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Navratri Day 1: The Divine Significance of Maa Shailputri and Her Blessings

नवरात्रि का प्रथम दिन: माँ शैलपुत्री की पूजा, महत्व और आशीर्वाद

माँ शैलपुत्री की आराधना
नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा होती है। वे नवदुर्गा का प्रथम स्वरूप हैं। कथा के अनुसार, पूर्वजन्म में वे सती थीं। पिता दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान सहन न कर पाने पर उन्होंने देह त्याग दी। अगले जन्म में वे हिमालय के घर जन्मीं, इसलिए शैलपुत्री कहलाईं। वृषभ पर सवार माँ के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल है। वे शक्ति, धैर्य और स्थिरता की देवी मानी जाती हैं।
पूजा के लिए स्नान कर पूजा-स्थान साफ करें। माँ की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। परंपरा हो तो कलश स्थापना करें; मिट्टी के पात्र में जौ बोएँ और कलश में जल भरकर ऊपर नारियल रखें। दीप जलाकर फूल, अक्षत और फल अर्पित करें। खीर या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएँ। माँ का ध्यान करते हुए पारंपरिक मंत्र जपें और श्रद्धा से प्रणाम करें। अंत में प्रसाद बाँटें।
भक्तों की मान्यता है कि माँ की आराधना से साहस, धैर्य, आत्मबल और मन की स्थिरता मिलती है। ये आस्था पर आधारित विश्वास हैं।

ध्यान-मंत्र:
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

माँ शैलपुत्री की आरती
शैलपुत्री माँ बैल असवार।
करें देवता जय-जयकार॥

शिव-शंकर की प्रिय भवानी।
तेरी महिमा किसी ने न जानी॥

पार्वती तू उमा कहलावे।
जो तुझे सुमिरे, सुख पावे॥

ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू।
दया करे, धनवान करे तू॥

सोमवार को शिव संग प्यारी।
आरती तेरी जिसने उतारी॥

उसकी सगरी आस पुजा दो।
सगरे दुख-तकलीफ मिटा दो॥

घी का सुंदर दीप जला के।
गोला-गरी का भोग लगा के॥

श्रद्धा भाव से मंत्र गाएँ।
प्रेम सहित फिर शीश झुकाएँ॥

जय गिरिराज किशोरी अंबे।
शिवमुख चंद्र चकोरी अंबे॥

मनोकामना पूर्ण कर दो।
भक्त सदा सुख-संपत्ति भर दो॥

यह ठीक है या इसे बदलना है?

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